इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश: FIR में दो साल की देरी और विशिष्ट आरोपों का अभाव, आरोपी सास को जमानत

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इलाहाबाद

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दहेज हत्या के एक मामले में आरोपी सास कलमुन निशा को जमानत दे दी है। जस्टिस समीर जैन की पीठ ने कलमुन निशा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (क्रिमिनल मिसलेनियस बेल एप्लीकेशन नंबर 4721 ऑफ 2026) में सुनवाई करते हुए पाया कि मामले की प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) घटना के दो वर्ष से अधिक समय बाद दर्ज की गई थी। मृतका की मृत्यु 11 मार्च 2023 को हुई थी, जबकि FIR 25 जुलाई 2025 को धारा 156(3) Cr.P.C. के तहत आवेदन के माध्यम से दर्ज कराई गई।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि आवेदिका के खिलाफ कोई विशिष्ट और ठोस आरोप स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं हैं। वह मृतका की सास है, उसका कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं है और वह 5 दिसंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में थी। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने उसे जमानत के योग्य माना।

कोर्ट की टिप्पणी: विसरा रिपोर्ट से आत्महत्या की संभावना से इनकार नहीं

मामला महाराजगंज जिले के निचलौल थाने में IPC की धारा 304B, 498A, 323, 506 तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत दर्ज किया गया था। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता सुश्री शबिस्ता परवीन ने तर्क दिया कि विसरा रिपोर्ट में एल्युमिनियम फॉस्फाइड के सेवन से मृत्यु की पुष्टि हुई है, जिससे आत्महत्या की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही यह भी बताया गया कि मृतका गंभीर रूप से बीमार थी और उसका उपचार चल रहा था।

राज्य की ओर से एजीए श्री शत्रुहन यादव ने जमानत का विरोध किया, किंतु बचाव पक्ष द्वारा प्रस्तुत देरी और मेडिकल साक्ष्यों का प्रभावी खंडन नहीं कर सके। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत आदेश में की गई टिप्पणियां केवल जमानत अर्जी के निस्तारण तक सीमित हैं और ट्रायल के दौरान मामले के गुण-दोष पर इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। कोर्ट ने व्यक्तिगत बांड और समान राशि के दो जमानतदारों पर रिहाई का आदेश देते हुए गवाहों से छेड़छाड़ न करने, तय तारीखों पर उपस्थित रहने और किसी भी आपराधिक गतिविधि से दूर रहने की कड़ी शर्तें भी लगाईं।

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