वाशिंगटन/नई दिल्ली/मॉस्को: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत और रूस पर लगाए गए नए टैरिफ (शुल्क) ने वैश्विक व्यापारिक संबंधों में नई हलचल मचा दी है। इन टैरिफों का सीधा असर दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने की आशंका है, वहीं भारत और रूस के बीच भी रणनीतिक रूप से कूटनीतिक विचार-विमर्श शुरू हो गया है।
अमेरिका ने हाल ही में भारत से आयात होने वाले कुछ इस्पात और एल्युमीनियम उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की है। यह कदम भारत के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि यह सीधे तौर पर निर्यात को प्रभावित करेगा और व्यापार घाटे को बढ़ा सकता है। भारतीय अधिकारियों ने इस फैसले पर निराशा व्यक्त की है और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के तहत जवाबी कार्रवाई की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं।
वहीं, रूस के मामले में, ट्रम्प प्रशासन ने रूसी स्टील और एल्युमीनियम पर भी इसी तरह के टैरिफ लगाए हैं। यह कदम रूस की उन कंपनियों को निशाना बनाता है जिन पर अमेरिका ने पहले प्रतिबंध लगाए थे। रूस ने अमेरिका के इस कदम की कड़ी निंदा की है और इसे “अस्वीकार्य” करार दिया है। मॉस्को ने भी जवाबी उपायों की चेतावनी दी है, जिससे दोनों देशों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंध और बिगड़ सकते हैं।
इन टैरिफों का द्विपक्षीय संबंधों पर सीधा असर तो पड़ेगा ही, साथ ही यह भारत और रूस के बीच ऐतिहासिक रूप से मजबूत आर्थिक संबंधों को भी प्रभावित कर सकता है। दोनों देश इस स्थिति का मूल्यांकन कर रहे हैं कि क्या वे अमेरिकी दबाव के सामने खड़े रह पाएंगे या उन्हें अपनी व्यापार नीतियों में बदलाव करना पड़ेगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत और रूस इस अमेरिकी कूटनीति का सामना कैसे करते हैं और उनके भविष्य के व्यापारिक गठबंधन कैसे आकार लेते हैं।