रालोद ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

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किसान आंदोलन के बहाने यूपी में जगह बनाने की कोशिश 

 चुनाव आयोग ने लक्ष्मण रेखा पार कर ली है


मथुरा
;चौधरी अजित संह के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकदल ने बंगाल के सीतलकुची में फायरिंग की घटना को ममता बनर्जी की तरह नरसंहार बताते हुये आज कहा कि चुनाव आयोग ने लक्ष्मण रेखा पार कर ली है ।

रालोद किसान आंदोलन के बहाने उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहा है ।
पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष कुंवर नरेन्द्र सिंह ने आज यहां शीतलकुची में सीआईएसएफ की फायरिंग की घटना को नरसंहार बताते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग ने दुःखद घटना के बाद राजनीतिज्ञों के वहां जाने पर रोक लगाकर लक्षमण रेखा को पार कर दिया है।
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल के शीतलकुची क्षेत्र में राजनीतिज्ञों के प्रवेश पर 72 घंटे के लिए रोक लगाकर ऐसा काम किया है जिसका उसे अधिकार ही नही है। निर्वाचन आयोग का कार्य चुनाव वाले क्षेत्र में शांतिपूर्ण तरीके से निष्पक्ष चुनाव सम्पन्न कराना होता है । निष्पक्ष चुनाव सम्पन्न कराने में बाधक अधिकारियों को बदलने का भी उसे अधिकार होता है तथा मुख्य सचिव और डीजीपी तक को चुनाव के दौरान बदलने का उसे अधिकार होता है किंतु चुनाव कराने के नाम पर मनमाने आदेश चलाने और पिछले दरवाजे से शासन चलाने की उसे इजाजत नही होती।
जो कार्य उस जिले के आरओ का है उसे निर्वाचन आयोग ने खुद किया है तथा ऐसा करके जहां उसने सीआईएसएफ को सबूत मिटाने का पूरा मौका दिया है वहीं इस आरोप पर भी मोहर लगा दी है कि चुनाव आयोग भाजपा के एजेन्ट के रूप में काम कर रहा है।

रालोद किसान आंदोलन के बहाने उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहा है ।
पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष कुंवर नरेन्द्र सिंह ने आज यहां शीतलकुची में सीआईएसएफ की फायरिंग की घटना को नरसंहार बताते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग ने दुःखद घटना के बाद राजनीतिज्ञों के वहां जाने पर रोक लगाकर लक्षमण रेखा को पार कर दिया है।
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल के शीतलकुची क्षेत्र में राजनीतिज्ञों के प्रवेश पर 72 घंटे के लिए रोक लगाकर ऐसा काम किया है जिसका उसे अधिकार ही नही है। निर्वाचन आयोग का कार्य चुनाव वाले क्षेत्र में शांतिपूर्ण तरीके से निष्पक्ष चुनाव सम्पन्न कराना होता है । निष्पक्ष चुनाव सम्पन्न कराने में बाधक अधिकारियों को बदलने का भी उसे अधिकार होता है तथा मुख्य सचिव और डीजीपी तक को चुनाव के दौरान बदलने का उसे अधिकार होता है किंतु चुनाव कराने के नाम पर मनमाने आदेश चलाने और पिछले दरवाजे से शासन चलाने की उसे इजाजत नही होती।
जो कार्य उस जिले के आरओ का है उसे निर्वाचन आयोग ने खुद किया है तथा ऐसा करके जहां उसने सीआईएसएफ को सबूत मिटाने का पूरा मौका दिया है वहीं इस आरोप पर भी मोहर लगा दी है कि चुनाव आयोग भाजपा के एजेन्ट के रूप में काम कर रहा है।

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